Iran Holocaust

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एविन जेल से नरगिस मोहम्मदी की आवाज़: नोबेल विजेता का संदेश

जेल की सलाखों के पीछे से, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी ईरान के दमनकारी शासन के खिलाफ अपनी बेजोड़ लड़ाई जारी रखे हुए हैं। इस लेख में एविन जेल से उनके दृढ़ संकल्प और मानवाधिकारों के लिए अथक संघर्ष को दर्शाया गया है।

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नरगिस मोहम्मदी: एक जीवन जो प्रतिरोध की गाथा है

नरगिस मोहम्मदी, 2023 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, का जन्म 21 अप्रैल, 1972 को ईरान के ज़ंजन में हुआ था। वह एक भौतिक विज्ञानी और इंजीनियर हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान ही मानवाधिकारों और महिला अधिकारों के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी थी। उनका जीवन ईरान में मानवाधिकारों के दमन के खिलाफ एक अथक संघर्ष का प्रतीक बन गया है। 1990 के दशक में उन्होंने छात्रों के समाचार पत्रों में लेख लिखकर अपनी आवाज़ बुलंद की। वह 'डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर' (DHRC) की उपाध्यक्ष बनीं, जिसकी सह-स्थापना एक अन्य नोबेल विजेता शिरीन एबादी ने की थी। ईरान में महिलाओं के अधिकारों और मृत्युदंड के खिलाफ उनके सक्रिय आंदोलन ने उन्हें बार-बार जेल पहुंचाया है, लेकिन उनकी भावना कभी नहीं टूटी।

मोहम्मदी का संघर्ष केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह ईरान के लाखों लोगों, विशेषकर महिलाओं और अल्पसंख्यकों की हताशा और आशा का प्रतिबिंब है। उन्होंने अपनी पत्रिका 'महिला समाज' में भी सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें लैंगिक असमानता और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित लेख प्रकाशित किए गए। उनकी गिरफ्तारी और कैद का सिलसिला 2000 के दशक में शुरू हुआ और तब से वे ईरान के विभिन्न जेलों में अपना काफी समय गुजार चुकी हैं। 2009 में, उन्हें 'डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर' में उनकी गतिविधियों के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के साथ ही, उनकी यात्रा शुरू हुई, जो उन्हें दुनिया के सबसे प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से एक बनाती है। उनके दृढ़ संकल्प और साहस ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, जिससे उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

ईरान के सुरक्षा बलों ने उन्हें कई बार गिरफ्तार किया है, उन पर 'राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ प्रचार' और 'व्यवस्था के खिलाफ जुटान और मिलीभगत' जैसे आरोप लगाए हैं। उनकी कैद की शर्तें अक्सर अमानवीय रही हैं, जिसमें एकांत कारावास, परिवार से दूरी और उचित चिकित्सा देखभाल से वंचित रहना शामिल है। इसके बावजूद, मोहम्मदी ने जेल के भीतर से भी अपनी आवाज उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने लेख लिखे, संदेश भेजे और जेलों में कैदियों की स्थिति को उजागर किया। उनकी कहानियाँ ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन की दुखद सच्चाई को दर्शाती हैं और दुनिया को बदलाव के लिए कार्रवाई करने का आह्वान करती हैं।

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Photo: Kimberli Mäkäräinen · CC BY-SA 4.0 · via Wikimedia Commons

एविन जेल: उत्पीड़न और प्रतिरोध का प्रतीक

तेहरान में स्थित एविन जेल, ईरान की सबसे कुख्यात जेलों में से एक है, जिसे राजनीतिक कैदियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को चुप कराने के केंद्र के रूप में जाना जाता है। नरगिस मोहम्मदी ने अपना अधिकांश समय यहीं बिताया है, जहां उन्हें कई बार अलग-अलग अवधियों के लिए कैद किया गया है। एविन जेल में कैदियों को अक्सर मनमाने ढंग से हिरासत में रखा जाता है, उचित न्यायिक प्रक्रिया से वंचित रखा जाता है और शारीरिक व मनोवैज्ञानिक यातनाओं का सामना करना पड़ता है। ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाएं लंबे समय से एविन जेल में स्थितियों की निंदा करती रही हैं, जिसमें यातना, जबरन कबूलनामे और चिकित्सा उपेक्षा के आरोप शामिल हैं। मोहम्मदी ने खुद इन भयानक स्थितियों के बारे में बताया है, जिसमें महिलाओं के लिए अपर्याप्त सुविधाएं और उनके अधिकारों का लगातार उल्लंघन शामिल है।

एविन जेल में मोहम्मदी का अनुभव ईरान में राजनीतिक असंतोष को दबाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली व्यापक रणनीति का एक प्रमाण है। उन्हें अक्सर बिना किसी स्पष्ट या सार्वजनिक आरोप के हिरासत में लिया जाता है, और उनके परीक्षणों को निष्पक्षता के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं करने के लिए जाना जाता है। उदाहरण के लिए, 2022 में, उन्हें 'राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ प्रचार' और 'व्यवस्था के खिलाफ जुटाने और मिलीभगत' के आरोपों के तहत आठ साल की जेल और 70 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी, जो उनके पिछले वाक्यों के अतिरिक्त थी। जेल के भीतर से, उन्होंने विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है, जिनमें 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुए देशव्यापी 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन शामिल हैं।

मोहम्मदी की एविन जेल से लिखी गई चिट्ठियां और संदेश, संघर्ष और उत्पीड़न के बीच भी आशा की एक किरण प्रदान करते हैं। उन्होंने जेल के भीतर अन्य महिला कैदियों के अनुभवों को भी उजागर किया है, जो अक्सर दुर्व्यवहार, उपेक्षा और बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रहती हैं। उनकी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि दमन के सबसे अंधेरे क्षणों में भी, मानवीय भावना जीवित रहती है और न्याय के लिए संघर्ष जारी रहता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बार-बार ईरान से मोहम्मदी और सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा करने का आग्रह किया है, यह तर्क देते हुए कि उनकी हिरासत मनमानी है और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है।

एविन जेल से नरगिस मोहम्मदी की आवाज़ ईरान के दमनकारी शासन और मानवाधिकारों के लिए बेजोड़ संघर्ष का प्रतिबिंब है।
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Photo: alisdare1 · CC BY-SA 2.0 · via Wikimedia Commons
नरगिस मोहम्मदी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही का सारांश (2009-2023)
वर्षगतिविधि/आरोपसजा (जेल/कोड़े)
2009पहली गिरफ्तारी (एचडीआरसी की गतिविधियों)घोषित नहीं
2011राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ प्रचार11 साल (बाद में 6 साल)
2015एचडीआरसी में गतिविधियाँआठ साल और 74 कोड़े
2021जेल में विरोध प्रदर्शन8 साल और 70 कोड़े
2022महिला, जीवन, स्वतंत्रता समर्थन16 महीने

'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन और नरगिस का योगदान

2022 में महसा अमिनी की दुखद मौत के बाद, ईरान में एक अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, जिसे 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन के नाम से जाना जाता है। यह आंदोलन ईरान के इतिहास में महिलाओं के नेतृत्व वाला सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बन गया, जिसने हिजाब, लैंगिक असमानता और इस्लामी गणराज्य के दमनकारी शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष को आवाज़ दी। इस आंदोलन के दौरान, नरगिस मोहम्मदी एविन जेल के भीतर से एक महत्वपूर्ण आवाज बनीं। उन्होंने जेल में बंद महिलाओं से एकजुटता व्यक्त की और हिरासत में उन पर होने वाले अत्याचारों को उजागर किया। उनकी रिपोर्टों ने मानवाधिकार संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को जेल की भयानक स्थितियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की।

जेल की दीवारों के पीछे से भी, मोहम्मदी ने कई लेख और बयान जारी किए, जिसमें उन्होंने ईरानी शासन के खिलाफ प्रतिरोध को जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से 2022 के नवंबर में जेल के भीतर से एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने महसा अमिनी की मौत की निंदा की और महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि कैसे जेल के अधिकारी महिला कैदियों को यातनाएं दे रहे हैं और उन्हें अमानवीय स्थितियों में रख रहे हैं। ईरानी मानवाधिकार समूह (IHR) ने बताया कि मोहम्मदी की रिपोर्टें उन दावों की पुष्टि करती हैं कि ईरानी अधिकारी कैदियों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। उनके संदेशों ने बाहरी दुनिया को भी बताया कि जेल के अंदर की महिलाएं बाहर के आंदोलन से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं और उन्हें कितना समर्थन दे रही हैं।

मोहम्मदी के कार्यों ने 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन को और अधिक गति प्रदान की। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वतंत्रता और समानता की लड़ाई जेल की दीवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक साझा मानवीय संघर्ष है। नवंबर 2023 में, न्यूयॉर्क टाइम्स ने एविन जेल से मोहम्मदी का एक निबंध प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने ईरान में महिलाओं की स्थिति और उनके संघर्ष को विस्तृत किया। इस निबंध में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाएं कैसे दमनकारी शासन के खिलाफ खड़ी हो रही हैं और अपनी बुनियादी स्वतंत्रता की मांग कर रही हैं। यह उनके नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के बाद एक शक्तिशाली संदेश था कि उनका काम अभी भी जारी है, भले ही वे जेल में हों।

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Photo: Bengt Oberger · CC BY-SA 4.0 · via Wikimedia Commons
नरगिस मोहम्मदी को आवंटित जेल की सज़ा के कुल वर्ष (2011-2022) 0247911 2011 (मूल)2011 (अपील)201520212022 जेल की सज़ा (वर्षों में) वर्ष
नरगिस मोहम्मदी को आवंटित जेल की सज़ा के कुल वर्ष (2011-2022)

नोबेल शांति पुरस्कार: दुनिया को जेल से संदेश

अक्टूबर 2023 में, जब नरगिस मोहम्मदी को 'ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की उनकी लड़ाई' के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया, तो यह खबर एविन जेल तक पहुंची जहां वे कैद थीं। नोबेल समिति ने मोहम्मदी के साहस और दृढ़ता की सराहना की, जिन्होंने अपनी स्वतंत्रता की कीमत पर भी न्याय के लिए संघर्ष किया। पुरस्कार की घोषणा ने ईरान के भीतर और बाहर लाखों लोगों को प्रेरित किया और ईरानी शासन पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाया। यह नोबेल पुरस्कार केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं था, बल्कि यह ईरान में मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे उन सभी लोगों के लिए एक पहचान थी, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जो 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन में सबसे आगे थीं।

नोबेल समिति ने विशेष रूप से मोहम्मदी की 13 गिरफ्तारियों, 5 दोषसिद्धियों और कुल 31 साल की जेल की सजा, साथ ही 154 कोड़े मारने की सजा का उल्लेख किया। इन आंकड़ों ने उनके संघर्ष की गंभीरता और ईरानी शासन के दमनकारी स्वभाव को रेखांकित किया। मोहम्मदी ने पुरस्कार की घोषणा के बाद एविन जेल से एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह इस सम्मान को एक साझा जीत मानती हैं और यह ईरान में महिलाओं के प्रतिरोध और स्वतंत्रता के लिए उनके संकल्प का एक प्रतिबिंब है। उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वे अपनी पूरी ताकत से इस आंदोलन को जारी रखेंगी, भले ही उनकी स्थिति कुछ भी हो।

पुरस्कार के बाद, मोहम्मदी एक बार फिर वैश्विक मंच पर मानवाधिकारों की आवाज़ बन गईं। उन्होंने जेल के भीतर से कई अंतर्राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स के माध्यम से संदेश भेजे, जिसमें उन्होंने ईरान में दमनकारी शासन के तहत कैदियों की भयावह स्थितियों को उजागर किया। उन्होंने दुनिया से आह्वान किया कि वह ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर आंखें मूंद न ले और कार्रवाई करे। द गार्जियन और बीबीसी जैसे समाचार आउटलेट्स ने उनके संदेशों को प्रकाशित किया, जिससे उनके विचारों और अनुभवों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाया जा सका। उनके संदेश में, उन्होंने ईरान में महिलाओं के विरोध आंदोलन 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' के महत्व पर भी ज़ोर दिया।

अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव और ईरान पर दबाव

नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद, ईरान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव काफी बढ़ गया है। दुनिया भर के नेताओं, मानवाधिकार संगठनों और जनता ने ईरान से उनकी तत्काल रिहाई और मानवाधिकारों के सम्मान का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने मोहम्मदी की रिहाई की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि उनकी हिरासत मनमानी है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन करती है। अमेरिकी विदेश विभाग और यूरोपीय संघ ने भी ईरान से मोहम्मदी और सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और उनके मानवाधिकारों का सम्मान करने का आग्रह किया है। यह सामूहिक वैश्विक आवाज़ ईरान के लिए एक मजबूत संदेश है कि उनके कार्यों को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा देखा जा रहा है और स्वीकृत नहीं किया जाएगा।

मोहम्मदी का मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए ईरान के खिलाफ एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, और ईरान ह्यूमन राइट्स (आईएचआर) जैसे संगठन उनके मामले की लगातार निगरानी कर रहे हैं और उनके समर्थन में अभियान चला रहे हैं। उन्होंने मोहम्मदी के स्वास्थ्य, उनके परिवार से मिलने के अधिकार और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के अधिकार के संबंध में चिंताएं जताई हैं। इन संगठनों द्वारा जारी की गई रिपोर्टें और प्रेस विज्ञप्तियां वैश्विक मंच पर ईरान के शासन पर दबाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नोबेल पुरस्कार ने इन प्रयासों को एक नई गति और ध्यान दिया है।

हालांकि अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ा है, ईरानी अधिकारियों ने फिलहाल मोहम्मदी को रिहा करने से इनकार कर दिया है। इसके बजाय, उन्होंने उनके खिलाफ नए आरोप लगाए हैं और उनकी हिरासत बनाए रखी है। द बोरूमंद सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने बताया है कि मोहम्मदी को उनके नोबेल व्याख्यान में भाग लेने से रोकने के लिए अधिकारियों ने जानबूझकर बाधाएं डालीं। यह ईरान की सरकार की अपनी नीतियों को बदलने के प्रति अनिच्छा को दर्शाता है, लेकिन यह भी संकेत देता है कि वैश्विक ध्यान और दबाव का उन पर कुछ असर हो रहा है। मोहम्मदी का संघर्ष अब ईरान के भीतर मानवाधिकारों की व्यापक लड़ाई का एक प्रतीक बन गया है, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय उम्मीद कर रहा है कि यह दबाव अंततः सकारात्मक बदलाव लाएगा।

आगे की राह: आशा और निरंतरता

नरगिस मोहम्मदी का एविन जेल से उठाया गया हर कदम, उनके द्वारा लिखा गया हर शब्द, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की हर प्रतिक्रिया ईरान में मानवाधिकारों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करती है। उनके नोबेल शांति पुरस्कार ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ईरान में महिलाओं के नेतृत्व वाला मानवाधिकार आंदोलन एक शक्तिशाली और अटल शक्ति है। यह केवल एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि यह एक आह्वान है कि ईरानी शासन को जवाबदेह ठहराया जाए और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए। ईरान के भविष्य में, यह देखना होगा कि शासन इस बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव और आंतरिक असंतोष का कैसे सामना करता है।

मोहम्मदी के संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि भले ही कोई व्यक्ति जेल की दीवारों के पीछे बंद हो, उसकी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता है। उनकी दृढ़ता ने दुनिया भर में लोगों को प्रेरित किया है, और यह ईरान में महिलाओं और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने वालों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उनके बच्चे, अली और कियाना, जो फ्रांस में निर्वासन में रहते हैं, ने उनकी ओर से नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया और अपनी माँ के संदेश को दुनिया तक पहुंचाया। यह परिवार का बलिदान भी ईरान में न्याय की लड़ाई के व्यापक दायरे को दर्शाता है।

आगे की राह चुनौतीपूर्ण होगी, लेकिन आशा कायम है। ईरान में 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन जारी है, और मोहम्मदी जैसी साहसी आवाज़ें इसे जीवित रख रही हैं। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि मानवाधिकारों के लिए संघर्ष एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके लिए साहस, दृढ़ संकल्प और वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता है। विश्व समुदाय की निरंतर भागीदारी और दबाव से ही ईरान में वास्तविक और स्थायी बदलाव आ सकता है, जहाँ नरगिस मोहम्मदी जैसे लोग अपने मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

Sources

  1. Narges Mohammadi: The Nobel Peace Prize laureate writing the world from an Iranian prison
  2. Nobel Peace Prize: Jailed activist Narges Mohammadi wins award
  3. Narges Mohammadi – Facts
  4. The Fight Continues: From Evin Prison, a Nobel Peace Prize Winner’s Message
  5. Iran: Jailed Narges Mohammadi unable to take Nobel Prize in person
  6. Iran: Evin prison fire: Families say lives are 'at risk'
  7. Narges Mohammadi's daughter accepts Nobel Peace Prize on her behalf

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