Key facts
- 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम' आंदोलन शुरू हुआ जिसमें 500 से अधिक लोग मारे गए।
- नवंबर 2019 के 'अबान' विरोध प्रदर्शनों के दौरान रॉयटर्स के अनुसार मात्र दो सप्ताह में 1,500 लोग मारे गए थे।
- 2009 का 'ग्रीन मूवमेंट' चुनावी धांधली के खिलाफ तेहरान की सड़कों पर लाखों लोगों को लाया था।
- ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के अनुसार, 2023 में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कम से कम 8 लोगों को फांसी दी गई।
- एविन जेल और गॉहरदश्त जेल राजनीतिक बंदियों के उत्पीड़न और यातना के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
- सितंबर 2022 में ज़ाहेदान में 'खूनी शुक्रवार' की घटना में सुरक्षा बलों ने 90 से अधिक लोगों की हत्या की।
ईरान विरोध प्रदर्शन: ऐतिहासिक संदर्भ और विकास
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का इतिहास सत्तावादी शासन और नागरिक अधिकारों के बीच एक निरंतर संघर्ष की कहानी है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से, ईरानी समाज ने कई बड़े आंदोलनों को जन्म दिया है, जो आर्थिक तंगी से लेकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मांग तक फैले हुए हैं। 'ईरान विरोध प्रदर्शन' शब्द केवल हालिया घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसने दशकों से ईरानी राजनीति को आकार दिया है। शुरुआती वर्षों में दमन का स्तर इतना अधिक था कि संगठित विरोध मुश्किल था, लेकिन 1990 के दशक के उत्तरार्ध में छात्र आंदोलनों ने नई ऊर्जा भरी। 1999 के छात्र विद्रोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि ईरान की युवा पीढ़ी अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है।
पिछले दो दशकों में, इन आंदोलनों की प्रकृति बदली है। जहाँ 2009 का ग्रीन मूवमेंट मुख्य रूप से मध्य वर्ग और सुधारवादी राजनीति से प्रेरित था, वहीं 2017, 2019 और 2022 के प्रदर्शनों में समाज के सबसे गरीब तबके और अल्पसंख्यक समुदायों की व्यापक भागीदारी देखी गई। द बोरुमंद सेंटर (Boroumand Center) के आंकड़ों के अनुसार, इन प्रदर्शनों में मांगें अब केवल 'सुधार' तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरी राजनीतिक संरचना के परिवर्तन पर केंद्रित हो गई हैं। यह परिवर्तन सुरक्षा बलों द्वारा किए जाने वाले अत्यधिक बल प्रयोग और जवाबदेही के पूर्ण अभाव के कारण और भी तीव्र हो गया है।
ईरान में विरोध प्रदर्शन अब केवल नीतियों के खिलाफ नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुके हैं।
2009 का ग्रीन मूवमेंट: 'मेरा वोट कहाँ है?'
जून 2009 में, राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों के बाद ईरान ने दशकों में अपना सबसे बड़ा सार्वजनिक विरोध देखा। आधिकारिक परिणामों में महमूद अहमदीनेजाद को विजेता घोषित किया गया, लेकिन विपक्षी उम्मीदवारों मीर-हुसैन मौसवी और मेहदी करोबी के समर्थकों ने बड़े पैमाने पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाया। तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग 'मेरा वोट कहाँ है?' के नारों के साथ उतर आए। यह आंदोलन, जिसे 'ग्रीन मूवमेंट' के नाम से जाना जाता है, ईरानी नागरिक समाज की शक्ति का एक अभूतपूर्व प्रदर्शन था। बीबीसी की रिपोर्टों के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बावजूद, बासिज मिलिशिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हिंसक कार्रवाई की।
इस आंदोलन के दौरान नेदा आगा-सोल्तान की हत्या का वीडियो वैश्विक स्तर पर दमन का प्रतीक बन गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दर्ज किया कि सैकड़ों कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनेताओं को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया गया और उन्हें कुख्यात एविन जेल में रखा गया। कई बंदियों ने कहारिज़क हिरासत केंद्र में यातना और यौन शोषण की रिपोर्ट की। हालांकि यह आंदोलन अंततः सुरक्षा बलों द्वारा कुचल दिया गया, लेकिन इसने ईरानी शासन की वैधता पर ऐसे सवाल खड़े कर दिए जो आज भी गूँज रहे हैं। नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया गया, लेकिन लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई।
नेदा आगा-सोल्तान की मौत ने दिखा दिया कि ईरानी शासन अपनी सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
| आंदोलन का वर्ष | प्रमुख कारण | अनुमानित मृत्यु संख्या | मुख्य स्थान |
|---|---|---|---|
| 2009 | चुनावी धांधली (ग्रीन मूवमेंट) | 70 - 100+ | तेहरान, इस्फहान |
| 2017-18 | आर्थिक तंगी और महंगाई | 25 - 50 | मशहद, राष्ट्रव्यापी |
| 2019 | ईंधन कीमतों में वृद्धि (ब्लडी अबान) | 1,500 (रॉयटर्स के अनुसार) | 100 से अधिक शहर |
| 2022-23 | महसा अमीनी की मौत (महिला, जीवन, स्वतंत्रता) | 550+ | कुर्दिस्तान, तेहरान, ज़ाहेदान |
| 2022 | ज़ाहेदान खूनी शुक्रवार | 90+ | सिस्तान-बलूचिस्तान |
2019 का 'ब्लडी अबान': आर्थिक संकट और खूनी दमन
नवंबर 2019 में, जब सरकार ने ईंधन की कीमतों में रातों-रात 300% की वृद्धि की, तो पूरे देश में स्वतःस्फूर्त विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। यह आंदोलन मुख्य रूप से आर्थिक रूप से हाशिए पर रहने वाले लोगों द्वारा संचालित था, जो बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान थे। 100 से अधिक शहरों में प्रदर्शन हुए, और प्रदर्शनकारियों ने बैंकों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया। रॉयटर्स के एक विशेष लेख के अनुसार, सर्वोच्च नेता अली खमेनेई ने आदेश दिया था कि 'विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए जो भी आवश्यक हो वह करें'। इसके बाद जो हुआ, वह आधुनिक ईरानी इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है।
इंटरनेट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया ताकि दुनिया को होने वाले कत्लेआम की खबर न मिले। सुरक्षा बलों ने छतों से प्रदर्शनकारियों के सिर और छाती को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट 'Trampling Humanity' में दस्तावेजीकरण किया कि कैसे बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार दिया गया। गिरफ्तार किए गए हजारों लोगों को बिजली के झटके, कोड़े मारना और छद्म फांसी जैसी यातनाएं दी गईं। इस दमन की क्रूरता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिलाकर रख दिया, लेकिन ईरान के भीतर इसने केवल शासन के प्रति नफरत को और गहरा किया।
नवंबर 2019 के दौरान मात्र 5 दिनों में ईरान ने 1,500 अपनों को खो दिया।
'महिला, जीवन, स्वतंत्रता': 2022 की क्रांति
16 सितंबर 2022 को 22 वर्षीय कुर्द महिला महसा (झिना) अमीनी की मौत ने ईरान में एक ऐसी चिंगारी सुलगाई जो एक वैश्विक आंदोलन बन गई। 'नैतिकता पुलिस' द्वारा हिजाब नियमों के उल्लंघन के लिए पकड़ी गई महसा की अस्पताल में मौत ने ईरानी महिलाओं के दशकों के गुस्से को सड़कों पर ला दिया। 'ज़ान, ज़ेन्दगी, आज़ादी' (महिला, जीवन, स्वतंत्रता) का नारा ईरान के हर कोने में गूंजने लगा। स्कूली छात्राओं ने अपनी हेडस्कार्फ़ उतारकर विरोध किया, जो इस्लामी गणराज्य के प्रतीकों पर एक सीधा प्रहार था। ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के अनुसार, यह आंदोलन पिछले आंदोलनों की तुलना में अधिक लंबा और भौगोलिक रूप से व्यापक था।
सरकार ने इस आंदोलन का जवाब अत्यंत क्रूरता से दिया। ज़ाहेदान में 30 सितंबर 2022 को, जिसे 'खूनी शुक्रवार' कहा जाता है, सुरक्षा बलों ने नमाज के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाईं, जिसमें 90 से अधिक लोग मारे गए। मानवाधिकार वॉच ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों, विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाने के लिए जानबूझकर चेहरे और जननांगों पर शॉटगन से छर्रे मार रहे थे। इसके बावजूद, नरगिस मोहम्मदी जैसी कार्यकर्ताओं ने जेल के भीतर से भी प्रतिरोध जारी रखा, जिसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह आंदोलन ईरानी समाज के भीतर एक बड़े सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलाव का प्रमाण है।
'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक नए ईरान का घोषणापत्र है।
दमन के तरीके और मानवाधिकारों का उल्लंघन
ईरान में विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके व्यवस्थित और अत्यंत हिंसक हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने बल प्रयोग के कई पैटर्नों की पहचान की है। सबसे आम तरीका प्रदर्शनकारियों पर सीधे घातक हथियारों का उपयोग करना है। इसके अलावा, ईरान का न्यायिक तंत्र दमन के एक औजार के रूप में कार्य करता है। प्रदर्शनकारियों को 'क्रांतिकारी अदालतों' में लाया जाता है, जहाँ उन्हें वकील चुनने का अधिकार नहीं होता। ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के अनुसार, 2022-23 के आंदोलनों के बाद कम से कम 8 लोगों को जल्दबाजी में की गई सुनवाई के बाद फांसी दे दी गई ताकि जनता में डर पैदा किया जा सके।
अस्पतालों में घायलों की निगरानी करना और उन्हें वहां से गिरफ्तार करना एक और भयानक रणनीति है। कई प्रदर्शनकारी पकड़े जाने के डर से अपनी आंखों और घावों का इलाज घर पर ही कराते हैं। जेलों के भीतर, विशेष रूप से एविन और राजाई शहर जेलों में, कैदियों को व्यवस्थित यातना दी जाती है। मानवाधिकार संगठनों ने बलात्कार और यौन हिंसा के मामलों को भी दर्ज किया है, जिसका उपयोग प्रदर्शनकारियों के मनोबल को तोड़ने के लिए किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन कृत्यों को 'मानवता के खिलाफ अपराध' के रूप में वर्गीकृत करने की मांग उठती रही है, लेकिन ईरान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती आई है।
ईरानी जेलें केवल दीवारों का घेरा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के व्यवस्थित हनन की प्रयोगशालाएं हैं।
भविष्य की राह और निष्कर्ष
ईरान विरोध प्रदर्शन का इतिहास यह स्पष्ट करता है कि दमन की हर लहर के साथ जनता का प्रतिरोध और भी मुखर होता जा रहा है। हालांकि शासन ने फिलहाल सड़कों पर बड़े प्रदर्शनों को बलपूर्वक रोक दिया है, लेकिन वे उन मूलभूत समस्याओं को हल करने में विफल रहे हैं जिन्होंने इन आंदोलनों को जन्म दिया। आर्थिक बदहाली, भ्रष्टाचार और युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं की अनदेखी ने शासन और समाज के बीच एक ऐसी खाई पैदा कर दी है जिसे अब पाटना असंभव लगता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान के भीतर बदलाव की मांग मजबूत बनी हुई है।
आने वाले वर्षों में, हम ईरान में और अधिक संगठित और रणनीतिक विरोध देख सकते हैं। 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जो एकजुटता पैदा की है, वह एक स्थायी बदलाव की नींव रख चुकी है। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर ईरान में जवाबदेही की मांग बढ़ती है, वैसे-वैसे वहां के नागरिकों का साहस भी बढ़ता है। अंततः, ईरान का भविष्य वहां की सड़कों पर संघर्ष कर रहे लोगों और जेलों में बंद उन साहसी आवाजों द्वारा तय किया जाएगा जो एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक ईरान का सपना देख रहे हैं। यह संघर्ष केवल ईरान का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा की वैश्विक लड़ाई का हिस्सा है।
Takeaways
- ईरान में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण व्यक्तिगत स्वतंत्रता की कमी और गहराता आर्थिक संकट है।
- दमन के साक्ष्य बताते हैं कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों और शॉटगन का अंधाधुंध उपयोग करते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने ईरान में जवाबदेही की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
Frequently asked questions
ईरान में 2022 के विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण क्या था?
2022 के विरोध प्रदर्शन 22 वर्षीय महसा अमीनी की 'नैतिकता पुलिस' (Gasht-e Ershad) की हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए थे। उन्हें गलत तरीके से हिजाब पहनने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह विरोध जल्द ही अनिवार्य हिजाब कानून को खत्म करने और इस्लामी गणराज्य के शासन परिवर्तन की मांग में बदल गया, जैसा कि ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) द्वारा प्रलेखित किया गया है। (Iran Human Rights, 2023)
नवंबर 2019 के विरोध प्रदर्शनों को 'ब्लडी अबान' क्यों कहा जाता है?
नवंबर 2019 (ईरानी महीना अबान) में ईंधन की कीमतों में अचानक वृद्धि के कारण राष्ट्रव्यापी विरोध शुरू हुए। रॉयटर्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधा हमला किया, जिसमें लगभग 1,500 लोग मारे गए। इसे 1979 की क्रांति के बाद से सबसे घातक दमन माना जाता है, इसलिए इसे 'ब्लडी अबान' कहा जाता है। (Reuters, 2019)
ईरान में प्रदर्शनकारियों को किस प्रकार की कानूनी सजाओं का सामना करना पड़ता है?
ईरान में प्रदर्शनकारियों पर अक्सर 'मोहारेबेह' (ईश्वर के खिलाफ युद्ध) और 'इफसाद-फिल-अर्द' (पृथ्वी पर भ्रष्टाचार) जैसे आरोप लगाए जाते हैं, जिनमें मृत्युदंड का प्रावधान है। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, बंदियों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं दिया जाता और उनसे जबरन कबूलनामे लेने के लिए शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाती हैं। (Human Rights Watch, 2024)
ग्रीन मूवमेंट (2009) की मुख्य मांगें क्या थीं?
2009 का ग्रीन मूवमेंट राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के विवादास्पद पुनर्चुनाव के बाद शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों का मुख्य नारा 'मेरा वोट कहाँ है?' था। वे चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन का नेतृत्व मीर-हुसैन मौसवी और मेहदी करोबी ने किया था, जो बाद में वर्षों तक नजरबंद रहे। (BBC News, 2010)
क्या अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन दमनों की जांच की है?
हाँ, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने 2022 के दमन की जांच के लिए एक स्वतंत्र 'तथ्य-खोज मिशन' स्थापित किया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने विस्तार से दस्तावेजीकरण किया है कि कैसे सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों की आंखों में जानबूझकर छर्रे मारे और बलात्कार को दमन के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। (Amnesty International, 2024)
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